
EOW जांच में राजोदा सहकारी समिति और जिला सहकारी बैंक के अधिकारियों पर संगठित वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप, 2016–2019 के बीच योजनाबद्ध तरीके से हुआ घोटाला
देवास जिले में किसानों के नाम पर किए गए 8 करोड़ रुपये से अधिक के सहकारी घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) उज्जैन इकाई द्वारा की गई जांच में खुलासा हुआ कि राजोदा स्थित वृहताकार प्राथमिक कृषि सहकारी साख संस्था और जिला सहकारी केंद्रीय बैंक देवास के अधिकारियों ने वर्ष 2016 से 2019 के बीच मिलकर योजनाबद्ध तरीके से शासन, बैंक और किसानों के साथ धोखाधड़ी की।
📊 फर्जी भूमि दर्शाकर करोड़ों का ऋण
जांच में पाया गया कि किसानों की वास्तविक भूमि के आधार पर उनकी साख सीमा तय कर ऋण दिया जाना था, लेकिन आरोपियों ने स्वयं के आर्थिक लाभ के लिए किसानों की भूमि से लगभग 400 हेक्टेयर अधिक भूमि दर्शाई।
* 2016–17: 139 हेक्टेयर अधिक
* 2017–18: 129 हेक्टेयर अधिक
* 2018–19: 137 हेक्टेयर अधिक
इस हेराफेरी के आधार पर किसानों की जानकारी के बिना उनकी पात्रता से 5 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण स्वीकृत कर दिया गया। इसके अलावा बिना साख सीमा स्वीकृत किए तीन वर्षों में 3 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त ऋण वितरित किया गया।
🌾 फसल बीमा में भी फर्जीवाड़ा
लगभग 300 किसानों के नाम पर कृषि बीमा में भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं।
1. एक ही फसल का एक वर्ष में एक से अधिक बार बीमा
2. बिना साख सीमा स्वीकृति के बीमा पॉलिसी
3. बीमा आवेदन में किसानों के बजाय आरोपियों के मोबाइल नंबर दर्ज
इन तरीकों से 65 लाख रुपये से अधिक की बीमा क्लेम राशि अवैध रूप से प्राप्त की गई।
✍️ जाली हस्ताक्षर कर निकाली गई राशि
जांच में यह भी सामने आया कि समिति के तत्कालीन सचिव महेश जैन ने किसानों के ऋण खातों से राशि निकालने हेतु विड्रॉल पर्चियों पर स्वयं हस्ताक्षर कर दिए।
* 1 करोड़ 12 लाख रुपये से अधिक की अवैध निकासी
समिति की कैशबुक में 20 लाख रुपये से अधिक की अनियमितता ऑडिट में प्रमाणित
💰 शासन योजनाओं का दुरुपयोग
आरोपियों ने नियम विरुद्ध स्वीकृत ऋण खातों में शासन की विभिन्न योजनाओं —
1. मुख्यमंत्री ऋण माफी योजना
2. ब्याज सब्सिडी
की राशि प्राप्त दर्शाकर शासन को अतिरिक्त आर्थिक नुकसान पहुंचाया।
👤 आरोपी अधिकारी
EOW ने निम्न आरोपियों के विरुद्ध अपराध दर्ज किया है:
1. महेश जैन — तत्कालीन सचिव एवं सहायक प्रबंधक, राजोदा सहकारी समिति
2. दिलीप नागर — तत्कालीन पर्यवेक्षक
3. अनिल दुबे — तत्कालीन शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक (मंडी प्रांगण शाखा)
4. अन्य सहयोगी
⚖️ दर्ज धाराएँ
आरोपियों के विरुद्ध निम्न धाराओं में अपराध पंजीबद्ध किया गया है:
धारा 420, 409, 467, 468, 471, 201, 120B भादवि
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 13(1)(क), 13(2)
संशोधित अधिनियम 2018 की धारा 13(1)(d), 13(2)
🔍 जांच की स्थिति
आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, भोपाल द्वारा अपराध पंजीबद्ध कर मामले को विवेचना में लिया गया है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि आरोपियों ने संगठित तरीके से शासन, बैंक और किसानों को करोड़ों रुपये की आर्थिक हानि पहुंचाकर स्वयं आर्थिक लाभ प्राप्त किया।





