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इंदौर हाईकोर्ट ने देवास एमजी रोड चौड़ीकरण को दी अंतिम मंजूरी; मध्य रेखा तय करना अनिवार्य, जबरन अधिग्रहण पर नकद मुआवजा ही मान्य — पूरे प्रदेश के लिए बनी कानूनी मिसाल

देवास, 04 दिसंबर 2025

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ ने देवास शहर में लंबे समय से विवादित सड़क चौड़ीकरण प्रोजेक्ट को 26 नवंबर 2025 को अंतिम मंजूरी प्रदान कर दी है।
न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने प्रहलाद डागा, सैयद जाकिर अली समेत कई याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए नगर निगम देवास को कार्य जारी रखने की अनुमति दी, लेकिन कड़े दिशा-निर्देशों के साथ।

🔶 हाईकोर्ट का मुख्य आदेश — अब यह पाँच नियम बंधनकारी होंगे

1️⃣ सड़क की Central Line सबसे पहले तय करना अनिवार्य

बिना मध्य रेखा निर्धारित किए किसी भी मकान को नापने, नोटिस देने या तोड़ने की कार्रवाई अवैध मानी जाएगी।

2️⃣ स्वेच्छा से जमीन न देने पर केवल FAR पर्याप्त नहीं

यदि मकान मालिक स्वेच्छा से जमीन सरेंडर करेंगे, तभी FAR (TDR) दिया जा सकता है।
लेकिन जबरन अधिग्रहण की स्थिति में नकद मुआवजा देना अनिवार्य है।

3️⃣ मुआवजा भुगतान की समयसीमा — कब्जा लेने के बाद 6 महीने में भुगतान

यदि निगम कब्जा ले लेता है, तो छह माह के भीतर भुगतान करना बंधनकारी होगा।

4️⃣ धारा 305 के तहत भूमि स्वतः निहित — पर मुआवजा रोकना गलत

कोर्ट ने कहा कि धारा 305 के तहत नोटिस जारी होने पर भूमि निगम में निहित हो जाती है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि मुआवजा रोका जाए।

5️⃣ मास्टर प्लान 2031 लागू — सड़क अधिकतम 12–15 मीटर तक चौड़ी हो सकेगी क्योंकि नया डेवलपमेंट प्लान 2041 केवल ड्राफ्ट है, इसलिए यह लागू नहीं माना जाएगा।

अतिक्रमण हटाने के दौरान का फोटो

🔶 कोर्ट द्वारा निर्धारित नई अनिवार्य प्रक्रिया

1. सड़क की मध्य रेखा निर्धारित होगी

यह पूरी प्रक्रिया का आधार मानी गई है।

2. मकान मालिकों को व्यक्तिगत नोटिस

निरीक्षण की तारीख और समय स्पष्ट रूप से बताया जाएगा।

3. संयुक्त निरीक्षण और माप-जोख

नगर निगम + टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग संयुक्त रूप से सीमांकन करेंगे।

4. माप रिपोर्ट पर मकान मालिकों की सुनवाई

रिपोर्ट पर आपत्ति का अवसर दिया जाएगा।

5. अंतिम आदेश → मुआवजा मूल्यांकन → कब्जा → 6 महीनों में भुगतान

🔶 याचिकाकर्ताओं की मुख्य आपत्तियाँ

मध्य रेखा तय किए बिना नोटिस अवैध

*केवल FAR/TDR देने से काम नहीं चलेगा, नकद मुआवजा अनिवार्य

*नया ड्राफ्ट प्लान 2041 चौड़ाई 12 मीटर प्रस्तावित करता है

*निगम 15–18 मीटर सड़क चौड़ीकरण दिखाकर अवैध कार्रवाई कर रहा है

🔶 नगर निगम का पक्ष और उस पर कोर्ट का रुख

नगर निगम ने दलील दी कि धारा 305 के तहत मुआवजा पहले देना जरूरी नहीं FAR/TDR देना पर्याप्त है
कब्जा लेते ही जमीन स्वतः निगम में निहित हो जाती है
कोर्ट ने इस तर्क को आंशिक रूप से खारिज कर दिया और कहा:
➡ “जबरन अधिग्रहण की स्थिति में नकद मुआवजा अनिवार्य है, FAR विकल्प नहीं है।”

🔶 मध्य प्रदेश के लिए बड़ा कानूनी प्रभाव

यह आदेश पूरे प्रदेश में सड़क चौड़ीकरण परियोजनाओं के लिए मिसाल बनेगा।
अब केवल TDR/FAR देकर ज़मीन लेना संभव नहीं होगा।
अन्य शहरों के विवादों में भी अब यही मार्गदर्शन लागू माना जाएगा।

🔶 निष्कर्ष — नगर निगम के लिए कड़ा लेकिन स्पष्ट रोडमैप

*हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि:

*सड़क चौड़ीकरण जारी रखा जा सकता है

*लेकिन प्रक्रिया पारदर्शी, मध्य रेखा आधारित और मुआवजा-केंद्रित होनी चाहिए

*मकान मालिकों के अधिकारों की अनदेखी नहीं की जा सकती
और धारा 305 का उपयोग “भय का हथियार” बनाकर नहीं किया जा सकता

देवास का यह फैसला अब मप्र के शहरी विकास के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

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